अर्जुन सिंह भण्डारी
1999 का वह कारगिल दिवस याद है हमे,
याद है हमे वह पाकिस्तान का धोखे से हमला करना,
भारत माँ के सीने पर हर घड़ी कई वार करना।।
कहने को 60 दिन का युद्ध था कारगिल का,
पर भारत के वीर सपूतों का बलिदान कोई कैसे भूल सकता है जब वीर जवानों ने 'आपरेशन विजय' के नाम पर भारत मां के ललाट पर विजय तिलक लगाया था,
भारत की तरफ आँख उठाये दुश्मनों को घुटने पर लाये थे।।
दुश्मन हमसे ऊंची चोटियों में बैठ गुरुर करते थे,
वीर सपूतों के हौसलो को गोलियों से छलनी करने का साहस कर रहे थे,
पर भारत माँ ने वह लाल जने है,
जिन्होंने सीने पर गोली खाये हर छोटी पर तिरंगा फहराया है,
अपने बदन से निकलती खून की बूंदों से धरती पर तिलक लगाया था।।
आज भी यह दिन हर भारतीय के सीने गर्व से चौड़े के देता है,
हौसलो से जीत कैसे हासिल होती है यह सच कर दिखाता है,
साथ हो जब हर भारतीय का साथ,
तो भारत का तिरंगा गर्व से गगन में लहराता है,
आंख दिखाए दुश्मन को आज "उसकी भूल का एहसास हर दिन याद दिलाता है।।"