देहरादून-: नीट यूजी काउन्सलिंग के प्रथम में एमबीबीएस में प्रवेश हेतु स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रितो का फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल करने के मामले में गठित एसआईटी टीम के हाथ छानबीन के दौरान 2 अभियुक्तो के गिरेबान तक पहुँच गए है। पुलिस ने आज अभियुक्तो की गिरफ्तारी कर ली गयी है। गिरफ्तार एक अभियुक्त मेरठ में मेडिकल की तैयारी करवाने वाली कोचिंग संस्थान का मालिक है। एसआईटी द्वारा गिरफ्तार इस फर्जीवाड़े के सरगना द्वारा 3 अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता सेनानी आश्रितो के फर्जी प्रमाणपत्रों पर एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के नाम पर 45 लाख रुपये में सौदा तय किया था, जिसकी पहली किश्त 20-20 लाख रुपये वह अभ्यर्थियों के परिजनों से वसूल चुका था। अभियुक्त विदेश में भी अलग अलग कोर्सों में कमीशन पर प्रवेश दिलाने का नेटवर्क चलाता है।
गौरतलब है कि बीती 13 सितंबर को थाना रायपुर तथा थाना क्लेमेंटाउन में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा 'अपनी सरकार' पोर्टल पर स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने हेतु ऑनलाइन आवेदन किये गए थे। उनकी जांच कर रहे राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने को प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी पाए गए। जिसके विरुद्धजांचकर्ता राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा थाना रायपुर पर मु0अ0सं0- 380/26 धारा 318(4) 338/336(2)/340(2) बीएनएस तथा थाना क्लेमेंटाउन पर मु0अ0सं0: 86/26 धारा: 318(4) 338/340(2)/61(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज करवाया था। मामले में और छानबीन होने पर उक्त बच्चो द्वारा एमबीबीएस में प्रवेश हेतु उक्त फर्जी आश्रित प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया जाना पता चला था। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस कप्तान प्रमेन्द्र डोबाल द्वारा एसपी ग्रामीण जया बलोनी के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की।
एसआईटी टीम द्वारा प्रकरण में संलिप्त अभियुक्तों के विरूद्ध साक्ष्य संकलन की कार्यवाही करते हुए प्रकरण से जुड़े सबूत एकत्रित करने के लिए सरकारी कार्यालयों में उक्त सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों को जब्त किया। जब्त दस्तावेज खंगालने पर अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में अंकित पते गलत पाये गये, जिस पर एसआईटी द्वारा सम्बन्धित शिक्षण संस्थानों में जाकर प्रकरण से जुडे सभी दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया, जिनके अवलोकन से उक्त अभ्यर्थियों के मूल पतों की जानकारी प्राप्त हुई।
प्राप्त जानकारी व विवेचना के दौरान प्रकाश में आये साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी द्वारा 2 व्यक्तियों, 1- रूपेश पण्डित(30) पुत्र गोपाल पण्डित निवासी ग्राम- शिवपुरी थाना केहाट, तहसील/ जिला पूर्णिया, (बिहार) हाल निवासी प्लॉट नंबर 90, द्वारिकापुरी कॉलोनी, थाना ब्रह्मपुरी, जनपद मेरठ, उत्तर प्रदेश, व अरविंद कुमार पुत्र विजयपाल सिह निवासी ग्राम - बहादरपुर खादर, थाना लक्सर, जनपद- हरिद्वार को पूछताछ हेतु थाना रायपुर पर लाया गया। जिनसे पूछताछ व प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर पुलिस द्वारा उन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस कप्तान प्रमेन्द्र डोबाल ने बताया कि अभियुक्त रूपेश पंडित अपने साथियों के साथ मिलकर पिछले 05 वर्षों से एज्युकेशन कन्सल्टेन्सी का कार्य कर रहा था तथा मेरठ में मिकोडो पाठशाला नाम से एक कम्पनी संचालित कर रहा था, जिसके माध्यम से वह विभिन्न प्राईवेट युनिवर्सिटिज व विदेशों में भी एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए, बीकॉम आदि कोर्सों में कमिशन पर एडमिशन दिलवाने का काम करता था।
गिरफ्तार अभियुक्त अरविन्द, रूपेश का पुराना परिचित था तथा पिछले 02-03 सालों से उसे जानता था। अरविंद थाना रायपुर में दर्ज मुकदमे में आरोपित युवती परी के पिता है, जिसने अपनी बेटी परी के एमबीबीएस में दाखिले के लिये रूपेश से सम्पर्क किया गया था। अरविंद ने रूपेश से अपनी बेटी के साथ अपने 02 अन्य परिचितों के बच्चों को भी एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने की बात की थी, जिस पर रूपेश द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से एडमिशन दिलवाने तथा प्रत्येक एडिमिशन के एवज में 45 लाख रुपये लेने की बात कही थी। तीनो अभ्यर्थियों के परिजनों से रूपेश तथा उसके साथियों द्वारा एडवांस के तौर पर 20-20 लाख रुपये लिये गये थे तथा एमबीबीएस में दाखिले व क्लासों के शुरू होने के बाद बाकी के पैसे देने की बात तय हुई थी।
प्रमेन्द्र डोबाल ने बताया कि अभियुक्त रूपेश पंडित इस कांड का सरगना है। उसके द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर तीनो अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनावाये गये थे। जिसके आधार पर उक्त तीनों अभ्यर्थियों द्वारा अलग-अलग मेडीकल कालेजों में एमबीबीएस कोर्स के लिये दाखिला प्राप्त किया था।
कप्तान प्रमेन्द्र ने बताया कि एसआईटी द्वारा प्रथम चरण में 2 अभियुक्तो की गिरफ्तारी की है, जो आगे और भी होने की सम्भावना है। उन्होंने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है, क्योंकि एसआईटी की रडार पर अभी बहुत से सीएससी सेन्टर है, जिनकी छानबीन जारी है। इस प्रकरण में अगर अन्य भी शामिल है तो उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।