देहरादून-: एमबीबीएस की सीट पाने के लिए उत्तराखंड़ के एक स्वतंत्रता सेनानी के फर्जी आश्रित बनकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने के मामले की जांच कल बुधवार को राजधानी देहरादून के 2 पटवारियों तक पहुँच गईं। जिला प्रशासन की ओर से सीडीओ अभिनव शाह की अध्यक्षता वाली टीम ने प्रमाणपत्र बनवाने हेतु लगाए गए कूटरचित दस्तावजो की जांच न करने व आरोपितों को फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने के आरोप में जिलाधिकारी डॉ0आशीष चौहान द्वारा कल बुधवार को राजधानी के 2 पटवारी जगदीश व डिंपल को निलबिंत कर दिया है।
वहीं जिलाधिकारी द्वारा एमबीबीएस प्रवेश में फर्जी प्रमाणपत्र मामले में सीधे तौर पर पटवारी को आरोपित बनने व निलम्बन के खिलाफ उत्तराखंड़ लेखपाल संघ द्वारा कल बुधवार को तहसील स्थित लेखपाल सभागार में आयोजित बैठक में कल शुक्रवार 25 सितंबर से दून जिला इकाई द्वारा सभी प्रमाणपत्रों के कार्य के बहिष्कार का एलान किया है।
लेखपाल संघ के प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिडियाल का कहना है कि मैदानी क्षेत्र में प्रत्येक पटवारी पर कार्य का अत्यधिक दबाव रहता है। प्रत्येक पटवारी पर हर दिन 50 से 100 प्रमाणपत्र सत्यापन का काम आता है, और आवेदक के द्वारा अपलोड किए दस्तावेजों के आधार पर ही पटवारी अपनी रिपोर्ट देनी होती है। ऐसे में कूटरचित दस्तावेजो की पहचान कर फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किए जाने के लिए सीधे तौर पर पटवारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नही है। उन्होंने कहा कि संघ मांग करता है कि इस मामले में सीएससी व फर्जीवाड़े में शामिल व्यक्ति व गिरोह की भूमिका की जांच भी हो।
बैठक के दौरान लेखपाल संघ प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि अगर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जारी प्रमाणपत्रो के मामले में लेखपालों पर दंडात्मक कार्यवाही जारी रहेगी तो संघ द्वारा प्रदेश के समस्त मैदानी क्षेत्रों में प्रमाणपत्रो के कार्यो के बहिष्कार के लिए बाध्य हो जाएगी।