9 टू 5 की जॉब करने वाला आज आम व्यक्ति अपने सुखद जीवन को जॉब में संघर्ष करता है, जो उसके खुद के स्वार्थ के लिए है, उसी स्वार्थ में बाहरी रूप से बस अपने आसपास के माहौल में सुरक्षा व शांति की आस जरूर रखता है, जिसकी उम्मीद वह 'ख़ाकी' से करता है- जो हमारे ऊपर आये संकट में दोस्त के आने से पहले दरवाजे पर आ जाती है, हम तकलीफ में हो और मदद की गुहार किससे लगाये उस उम्मीद पर ख़ाकी हर बार खरी उतरती है। कानून व आम जनता के बीच के सेतु के रूप में ख़ाकी सदैव जन के साथ खड़े रहने की जद्दोजहद में लगी रहती है, जिसमे कई बार सफल होती है, कई बार घायल भी होती है, पर कभी रुकती नही। एक मोर्चे पर नही तो किसी और मोर्चे पर नए सिरे से शुरू करती है।
एक आदर्श समाज की बुनियाद में सुशासन जितने मायने रखता है उस सुशासन को धरातल पर उतारने व लॉ एंड आर्डर को सही दिशा में बनाये रखने को ख़ाकी 24*7 कार्यशील रहती है।
रोजमर्रा के लॉ एंड आर्डर का जिम्मा तो सम्भालना ही है- जहां किसी का पड़ोसी से झगड़ा है तो थाने आ गए, किसी ने किसी को धोखा दिया तो पुलिस के दर पर आना है, खूनी संघर्ष में कानूनी सजा दिलानी है, आदि के बाद कभी नेता,किसी पार्टी का सत्ता पार्टी के खिलाफ जुलूस है, धरना है तो धूप हो छांव हो, आंधी भी आये चाहे सैलाब आये सब घर के अंदर हो या भाग रहे हो तो भी ख़ाकी का हाथ, ख़ाकी के सहारे मुश्किलों से लड़ने का हौसला खुद ख़ाकी मुश्किल के आगे ढाल बनकर निभाती है। फिर कभी परीक्षाओं में सुरक्षा का जिम्मा हो, उग्र प्रदर्शन हो ख़ाकी की 2 से 3 सुरक्षा लेयर सबसे आगे होगी तब जाकर आम जनता पर उसकी मार पड़ेगी।
कई मौके ऐसे भी है जहां ख़ाकी ने साहसिक प्रदर्शन कर जनता का असीम प्रेम पाया है, जनता ने सहर्ष फूलों से ख़ाकी का स्वागत किया है, तो वहीं ऐसे मौके अनगिनत है जहां जिनकी सुरक्षा में तैनात है वहाँ ही पत्थर खाने को भी ख़ाकी तैयार है, किन्तु सुरक्षा मोर्चे से पीछे हटना फर्ज के खिलाफ है। ख़ाकी में भी इंसान है जो अचानक हुए हमलों में घायल होकर थोड़ा पीछे हटेगा स्वाभाविक है, किन्तु मोर्चो पर लौटना ही ख़ाकी की पहचान है।
सहसपुर में हुई घटना में बुलडोजर चलाने का जिम्मा प्रशासनिक था किंतु उस आदेश का अनुपालन ख़ाकी एक जिम्मा है तो वहीं दो गुटों, समुदाय को शांति में रखने का जिम्मा भी ख़ाकी का था, जिसपर वह कल शानिवार रात से जिम्मा संभाले है, तो वहीं दोपहर बाद गुस्साई भीड़ ने ख़ाकी पर पथराव भी कर दिया, जिससे वह 2 कदम पीछे हट गए किन्तु स्थिति पर वापिस नियंत्रित पा लिया, जो ख़ाकी का प्रतिबद्धता व मजबूती, परस्पर हिस्सा दिखाता है।
किन्तु ख़ाकी केवल जनता की सुरक्षा के लिए व जनता की तरफ हाथ बांधे खड़ी है तो कुछ भी करलो की मानसिकता रखने वाले उपद्रवियों के खिलाफ कार्यवाही किस अंदाज़ में की जाती है यह भी ख़ाकी बखूबी समझाने में माहिर है। डंडे का इस्तेमाल कब कहाँ किस स्तर पर किया जाता है वह ख़ाकी बखूबी समझता है क्योंकि लॉ एंड आर्डर का जिम्मा उनके हाथों है और वह अपनी सूझबूझ से वहां पहुँचे है। इसलिए लॉ एंड आर्डर का मज़ाक बनाने वाले ख़ाकी के आदेशों का अनुपालन करना व सहयोग करना जितना जल्दी सीखे समाज के लिए उतना बेहतर है, क्योंकि वह सुरक्षा हमारे लिए ही है।