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कभी-कभी इंसानों के नक्षत्र बुरे होते है

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कभी-कभी इंसानों के नक्षत्र बुरे होते है

shikhrokiawaaz.com

10/02/2025


देहरादून-:  कभी कभी इन्सान के नक्षत्र इतने बुरे हो जाते है कि वो चाहे लाख कोशिश क्यों न कर ले उसके साथ बुरा हो ही जाता है। जिसका जिम्मा किसे और किसके सिरे आये वह समझना मुश्किल हो जाता है! और जिस इंसान के साथ वह 'परिस्थिति'गठित हुई उसका आचरण उस परिस्थिति के विपरीत हो तब तो किसी को भी यकीन करना मुश्किल होता है।कुछ ऐसा ही मामला कल देर रात थाना राजपुर में थानाध्यक्ष राजपुर के साथ हुआ। जहां वह कल देर एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने के बाद थानाध्यक्ष राजपुर जब अपनी गाड़ी से वापिस आ रहे थे तो उनसे गलती से राजपुर क्षेत्र में 3-4 गाड़ियों को टक्कर लग गयी। उस घटना से राजपुर क्षेत्र के लोगो द्वारा रोष व्यक्त किया गया और पुलिस कप्तान द्वारा भी एक खाकी धारक के इस आचरण पर उन्हें तत्काल निलंबित किया गया व मामले में जांच फिलहाल चल रही है।

इस मामले में फिलहाल तक सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच कई धारणा बन चुकी है, ख़ाकी के लिए कुछ समय पहले चल रही 'बयानबाजी' में कई लोगो को यह और मसालेदार खबर जैसा मिल गया है। लेकिन मैं एक निष्पक्ष राय में देखूं तो यह एक ख़ाकी के उस 'क्षण' के आचरण के तौर पर गलत है किन्तु उनके द्वारा अपने व्यवहार के मुताबिक शांत तौर पर उस घटना को हैंडल किया।  घटना के तुरंत बाद उन्होंने मौके पर ही शांत रहकर अपनी गलती को स्वीकार किया और अपने साथी कर्मियों की कार्यवाही में सहयोग न कि अपने पद का रौब दिखाया गया, यह भी नही भूलना चाहिए। वर्तमान(जो फिलहाल निलंबित कर दिए गए है) थानाध्यक्ष शांत व कुशल व्यवहारी रहे है। अपनी ड्यूटी के दौरान वह जिस भी थाने,चौकी में रहे वहाँ सदैव अपनी टीम का कुशल नेतृत्व, फरियादियों की शिकायतो पर तुरंत कार्यवाही व कई मर्तबा अपनी जान पर खेलकर कई हादसों को होने से बचाया है,घायलों को बचाया।

कल रात की घटना गलत थी किन्तु खाकी में भी एक इंसान है यह भी हमे नही भूलना चाहिए। कई गलतियों में हम स्वयं की गलती होने पर खाकी से अपने प्रति अच्छे आचरण की उम्मीद करते है तो ख़ाकी पहने मानव से हुई एक गलती में हमे उसके प्रति थोड़ा संयमित आचरण रखना चाहिए। मैं यह भी नही कहता कि विभाग जो कार्यवाही कर रहा वह गलत है,क्यों कर रहा, वह विभागीय मामला है, किन्तु आम जनता के तौर पर ख़ाकी को एक गलती की वजह से पूरी तरह कसूरवार बना देना थोड़ा गलत हो जाता है। उस इंसान के प्रति उसकी पुराने आचरण को भी ध्यान में रखकर धारण बनाना भी कई बार थोड़ा जरूरी होता है, एक मानवीय धर्म के नाते ही सही। और शायद कल रात की घटना न ही विभाग ने थानाध्यक्ष से उम्मीद रखी होगी न शायद थानाध्यक्ष द्वारा स्वयं ही वह उनके हाथों हो जाने की सोची होगी।


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