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बदलाव की तस्वीर व वादे को पूरा करने की तस्वीर 'बालेंद्र शाह'

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बदलाव की तस्वीर व वादे को पूरा करने की तस्वीर 'बालेंद्र शाह'

shikhrokiawaaz.com

04/21/2026



A promise is a promise नेपाल के परिपेक्ष में आज यह शब्द मात्र शब्द नही लगते , यह वह शब्द है जो नेपाल के आज तक के इतिहास में सबसे युवा प्रधानमंत्री का गौरव हासिल कर चुके मात्र 35 वर्षीय बालेंद्र शाह ने कभी अपने देश के हर एक नागरिक से कहा था।  वर्ष 2025 में जेन जी आंदोलन के बीच देश मे ' भ्रष्टाचार, अवस्थाओं, बेरोजगारी, पारदर्शिता, टूटी अर्थव्यवस्था' में बदलाव को अपने देश के युवाओं को एकमत होकर साथ आने का आवाहन किया था, जनता ने उनपर विश्वास किया और हर उस वादे को निभाने को बालेंद्र शाह ने मजबूत नींव डाल दी है, और अपने द्वारा देश में सुधार को किये जा रहे implementation के साथ " A promise is a promise" को हकीकत कर रही है।

नेपाल भारत के उत्तर में बसा एक छोटा सा देश, जो पर्यटन व पहाड़ी भूगौल के लिए सदैव से अपनी पहचान रखता है, किन्तु भीतरी तौर पर देखे लोकतंत्र व राजतंत्र के बीच फंसा ऐसा देश जहाँ लोकतंत्र व राजशाही के हर नेता ने वहां भ्रष्टाचार का ऐसा बीच बोया जिसके बाद से जो भी वहां की सत्ता में काबिज हुआ उसने नेपाल को अंदर से खोखला कर दिया। 1990 में नेपाल में लोकतंत्र आया, फिर 2006 में माओवादी आंदोलन व राजशाही खत्म हो गयी। 2008 में नेपाल गणतंत्र बना तो लोगो मे।उम्मीद जगी, 2015 में नेपाल ने अपना संविधान लागू किया तो जनता को लगा अब नेपाल में बदलाव आएगा। किन्तु 18 सालों में नेपाल में 14 प्रधानमंत्री एक के बाद एक सत्ता में आते रहे-के0पी0शर्मा ओली, पुष्प कुमार दहल प्रचंड व शेर बहादुर देओपा जैसे प्रधानमंत्री बारी बारी से नेपाल की सत्ता पर काबिज हुए किन्तु किया क्या मात्र नेपाल को लूटा, अंदर से खोखला करते चले गए। 2- 2 साल के लिए सत्ता में हेर फेर करते हुए एक दूसरे को नेपाल को लूटने का प्लान बनाने भर उनका मंतव्य जगजाहिर होता चला गया।

नेपाल के इन हालातों से आम जनता हमेशा पीड़ित रही, कोई बड़ी औद्योगिग क्रांति नही, रोजगार नही, टूटी फूटी सड़कें, बदहाल सिस्टम व नेताओं का भ्रष्टाचार नेपाल को कभी आगे बढ़ा ही नही पाया। देश का युवा हर दिन 1700 की तादाद में नेपाल छोड़कर बाहरी देशों में जाने लगा ,जिनके द्वारा कमाया गया विदेशी धन ही नेपाल की अर्थव्यवस्था का 25 प्रतिशत भागीदार बना हुआ है। नेपाल में जब युवा देश की परेशानियों से घिरा था उस समय भ्रष्ट नेताओं के बच्चे सोशल मीडिया में अपनी हाई क्लास लाइफस्टाइल, इम्प्रोटेड आइटम्स, अपनी विदेशों में उच्च शिक्षा का प्रदर्शन कर नेपाल के युवाओं को नीचा दिखाने का काम कर रहे थे, जिसके खिलाफ नेपाल में सितंबर 2025 में जेन जी आंदोलन शुरू हुआ। आंदोलन से घबराए नेताओं ने युवाओं को दबाने को 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद कर दिये, आंदोलन में युवाओं पर हमले में 77 मौत सहित 2300 लोग घायल हो गए। काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह उस समय युवाओं की आवाज़ बनकर उभरे, उनके द्वारा गाये गए गाने "नेपाल हसेगो" ने युवाओं में जोश भर दिया। 

नेपाल की आरएसपी पार्टी के साथ हाथ मिलकर बालेंद्र शाह ने जनता से वोट नही समर्थन मांगा जिसके नतीजे स्वरूप आरएसपी ने 275 में से 182 वोट हासिल कर नेपाल की सत्ता में 1959 के बाद से अब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल कर ली।

बालेंद्र शाह की कैबिनेट में 14 युवा नेता शामिल है, जिसमे 30 प्रतिशत 40 साल से नीचे है, 5 महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जो पूरे विश्व की सबसे युवा कैबिनेट है।  उनके द्वारा अपने वादे अनुसार बड़े बदलाव में डिजिटल गवर्नेंस की नींव रखी है- जिसके तहत ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट व अन्य सेवाओं के लिए लोगो को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नही काटने होंगे बल्कि 100 दिन के अंदर उनके घर तक वह कागज़ पहुचाये जाएंगे। उनके द्वारा मंत्रालयों की संख्या 22 से घटाकर 16 रखी है व हर मंत्रालय की समयबद्धता व हर कार्यवाही व काम के लिए जिम्मेदार व जवाबदेही अनिवार्य किया है। 

एक तरफ भारत मे जहां नेताओं के साथ उनका 10- 20 गाड़ियों का काफिला चलता है, बालेंद्र शाह द्वारा उसके उलट नेताओं के साथ काफिले को इनकार कर दिया है, नेताओं को जनता के साथ ही भीड़ में आम इंसान की तरह गुजरने का नया नियम जैसे बदलाव लागू किया है। सबसे खास बदलाव जिसने सरकारी सिस्टम में दोगुले नेचर की पोल रखने वालों के लिए बड़ा उदाहरण सेट किया है वह है- नेपाल में हर नेता , अधिकारी का बच्चा सरकारी स्कूल में जाने की अनिवार्यता। भारत मे स्कूलों की जर्जर हालत रहती है, सरकारी नौकरी व सेवा के पीछे सभी अधिकारी, नेता भागते है किंतु अपने बच्चो कोज़ सरकारी स्कूल में पढ़ाना कोई नही चाहते। बालेंद्र शाह का मानना है कि नेता का बच्चा जब खुद उस स्कूल में जायेगा तो नेता खुद स्कूल की हालत समझेगा व्यवस्था सुधारेगा।सारे सरकारी कार्यालयों से जिंदा नेताओं की तस्वीर हटाने, नेताओं के काम को जनता द्वारा ट्रैक करने की पहल,2025 के आंदोलन में जान गवाने वाले युवाओं के परिवार से एक को नौकरी, 36 साल के भ्रष्टाचार की जांच आदि को धरातल पर उतारा है व हर कार्य को पूरा करने सहित " A promise is a promise" को दोहराया है। देश व धर्म को अलग रख कार्य करने को बालेंद्र की प्रतिबद्धता से भारत मे धर्म की राजनीति करने वालो के सीख है। हालांकि देश की खराब आर्थिक हालात को पटरी पर लाने को बालेंद्र शाह व उनकी टीम को कड़ी मेहनत करनी होगी, राह आसान नही है, किन्तु युवाओं के चेहरे द्वारा यह शुरुआत दुनिया की कई भ्रष्ट सरकारो के लिए एक उदाहरण बन गयी है।
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