देहरादून:उत्तराखंड में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने ट्रामाडोल तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए अहम कार्रवाई की है।
हरिद्वार के मंगलौर क्षेत्र से मई 2026 में बरामद 18 हजार प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल मामले की जांच के दौरान पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया कि मुजफ्फरनगर स्थित एक फार्मा स्टोर के माध्यम से उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल की आपूर्ति की जा रही थी। आरोपी विभिन्न दवा कंपनियों से इन कैप्सूलों की खरीद कर उन्हें राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय लोगों के जरिए सप्लाई करता था। इसके बदले वह मूल कीमत से कई गुना अधिक दाम वसूलकर अवैध मुनाफा कमा रहा था।
विवेचना के दौरान पुलिस को मिले दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि जनवरी से मई 2026 के बीच केवल पांच महीनों में एक दवा कंपनी से ट्रामाडोल कैप्सूल खरीदने के लिए करीब 35 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह कारोबार लंबे समय से संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था और इसकी पहुंच उत्तराखंड के कई जिलों तक थी।
साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मुजफ्फरनगर निवासी सचिन मनिहाल पुत्र सुरेश निवासी-जनकपुरी, मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश जो एक फार्मा स्टोर का संचालक है, को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी ने प्रतिबंधित दवाओं की खरीद और सप्लाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि की है। उसके कब्जे से इस अवैध कारोबार में इस्तेमाल किया गया एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है।
एसटीएफ अब आरोपी की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।एसएसपी एसटीएफ का कहना है कि उक्त मामले में आगे भी कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।