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इग्नू कार्यक्रम में सामाजिक बाधाओं और लैंगिक असमानता पर हुआ गहन मंथन

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इग्नू कार्यक्रम में सामाजिक बाधाओं और लैंगिक असमानता पर हुआ गहन मंथन

shikhrokiawaaz.com

04/14/2026

देहरादून:इग्नू क्षेत्रीय केंद्र, देहरादून द्वारा कल 13 अप्रैल को इग्नू अध्ययन केंद्र 2705 डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून में एक शैक्षणिक परिचर्चा का आयोजन किया गया।
उक्त परिचर्चा का विषय “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के त्वरित कार्यान्वयन की आवश्यकता” रहा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच लोकतांत्रिक संस्थाओं जैसे लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़ी असमानताओं पर विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करना था।
इस कार्यक्रम में लगभग 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें छात्र-छात्राएँ,डीएवी पीजी कॉलेज के संकाय सदस्य तथा इग्नू क्षेत्रीय केंद्र के शैक्षणिक अधिकारी शामिल रहे। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के सेमिनार हॉल (बॉटनी गैलरी) में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अनिल के. डिमरी द्वारा की गई, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य और इसकी सामाजिक प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रूप में इतिहास विभाग की प्रो.अंजू बाला पांडे ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ की पृष्ठभूमि, ऐतिहासिक विकास तथा इसके महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. जगदंबा प्रसाद तथा अध्ययन केंद्र 2705 की समन्वयक डॉ. ओनिमा शर्मा ने प्रतिभागियों को परिचर्चा की प्रक्रिया और नियमों की जानकारी दी। कार्यक्रम का समन्वय इग्नू अध्ययन केंद्र 2705 के सहायक समन्वयक डॉ. विकास चौबे द्वारा किया गया।
परिचर्चा का विषय था— “नीति-निर्माण एवं विधायिकाओं में महिलाओं के न्यून प्रतिनिधित्व के पीछे सामाजिक एवं सांस्कृतिक बाधाएँ।” इस विषय पर कुल 10 प्रतिभागियों (7 छात्राएँ एवं 3 छात्र) ने अपने विचार प्रस्तुत किए। सभी प्रतिभागियों ने विषय पर गंभीर एवं प्रभावशाली ढंग से चर्चा की।
प्रतिभागियों ने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या के अनुपात में काफी कम है। उन्होंने इसके पीछे पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचा, राजनीतिक दलों में सीमित अवसर, चुनावी खर्च की अधिकता, पारिवारिक सहयोग की कमी तथा लैंगिक रूढ़ियों को प्रमुख कारण बताया। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि महिलाएँ शिक्षा, रक्षा, पुलिस, सेवा क्षेत्र, विनिर्माण और स्टार्ट-अप जैसे अनेक क्षेत्रों में सक्रिय योगदान दे रही हैं, लेकिन राजनीति में उनकी भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है।
प्रतिभागियों ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि इस अधिनियम के क्रियान्वयन में पहले भी विलंब होता रहा है, इसलिए इसे अब बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कुमारी गौरी को प्रथम पुरस्कार, कुमारी लक्ष्मी को द्वितीय पुरस्कार तथा कार्तिकेय को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। अन्य सक्रिय प्रतिभागियों को भी उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम में डॉ. नैना श्रीवास्तव, डॉ. उषा पाठक, डॉ. अमित कुमार, डॉ. ए.सी. बाजपेयी, डॉ. ज्योति सेंगर सहित अन्य संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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