
देहरादून-: विदेशी नागरिकों के फ़ोन नंबर खरीद उनके फोनों में खराबी होने का झांसा देकर एंटीवायरस उपलब्ध करवाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले एक गिरोह के 5 सदस्यों को राजपुर पुलिस द्वारा कल देर रात आर्चिड पार्क, तरला नागल रोड स्थित एक फ्लैट से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तो द्वारा ज़्यादातर अमेरिका, कनाडा के नागरिकों से धोखाधड़ी की गई थी।
कल मंगलवार रात को थाना राजपुर पुलिस को राजपुर क्षेत्र में एक फ्लैट में कुछ लोगो द्वारा अवैध कॉल सेंटर संचालित किये जाने व कॉल सेन्टर के माध्यम से विदेशी नागरिकों व अन्य लोगों के साथ ठगी किये जाने की सूचना मिली। सूचना पर राजपुर पुलिस द्वारा अलग अलग टीमो का गठन किया गया।
राजपुर पुलिस द्वारा बिन देर किए कल सोमवार देर रात ही क्षेत्रान्तर्गत आर्चिड पार्क, तरला नागल रोड पर स्थित एक फ्लैट पर संचालित हो रहे एक फर्जी कॉल सेन्टर पर छापेमारी कर 05 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने अभियुक्तो के कब्जे से 14 मोबाइल फोन, 04 लैपटाप, 01 आईपैड व ठगी हेतु इस्तेमाल किये जा रहे अन्य उपकरण बरामद हुए। पुलिस द्वारा सभी डिवाइस को सीज कर दिया गया है। वहीं मौके से अभियुक्तो की 3 गाड़ियों को भी सीज किया गया है।
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान 1- आशीष नागर(32) पुत्र अखिल नागर निवासी 93 मोरिवाड़ा थाना कोतवाली सिटी मेरठ उत्तर प्रदेश, 2-अक्षत शर्मा(22) पुत्र अरविंद शर्मा निवासी 122 शाहखाकी चौक थाना कोतवाली सिटी मेरठ उत्तर प्रदेश,3-अंशु मुद्गल(23) पुत्र मनीष मुद्गल निवासी 36 अनूप नगर फाजलपुर मेरठ उत्तर प्रदेश, 4-राज सिंह(23)पुत्र अजय कुमार निवासी सिलवारा रोड सिविल लाइन थाना सिलवारा रोड जनपद सुलतानपुर उत्तर प्रदेश,5-अभिनव सिंह(25) पुत्र सुनील कुमार निवासी 1101/12 थाना शास्त्री नगर जनपद सुलतानपुर उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। गिरफ्तार अभियुक्तो द्वारा उक्त कॉल सेन्टर के माध्यम से विदेशी ग्राहकों को उनके फोन व लैपटॉप में एंटी वायरस डालने के नाम से धोखाधड़ी करना बताया गया। गिरफ्तार पांचों अभियुक्तों के विरुद्ध थाना राजपुर पर धारा 318(4)/3(5) बीएनएस में अभियोग पंजीकृत किया गया।
पूछताछ में मुख्य अभियुक्त आशीष द्वारा बताया गया कि वह पहले नोएडा स्थित एक कॉल सेन्टर में काम करता था, जहां उनके द्वारा विदेशी नागरिको को कॉल कर इसी प्रकार धोखाधडी की जाती थी। 03 माह पूर्व वह उक्त नौकरी को छोडकर देहरादून आ गया तथा देहरादून में अलग-अलग जगहों पर काम करने लगा। काम के दौरान उसके द्वारा एक वर्चुअल मोबाइल नंबर लिया गया था, जिसे उसने बीटीसी बॉस नाम से सेव किया गया था।
देहरादून में उसके द्वारा राजपुर क्षेत्र में एक फ्लैट किराये पर लेकर उसमें अपने साथियों के साथ फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था, जिसके लिए उसके द्वारा विदेशी नागरिकों के करीब 5000 मोबाइल नंबर खरीदे गये थे, जिन्हें वह स्वयं व अपने साथियों के माध्यम से गूगल वॉइस एप के द्वारा कॉल कर उनके फोन मे खराबी होने तथा उसे ठीक करने के एवज में उनके मोबाइल पर एण्टीवायरस एप डाउनलोड करने की जानकारी ददेता था। वह सभी एप्प को उन्हें देने के एवज में उनसे 100 डालर कीमत का गिफ्ट कार्ड खरीदवाकर उसका नम्बर बताने अथवा फोटो मंगाया जाता था, जिसे उनके द्वारा बीटीसी बॉस के नाम से सेव किए गए वर्चुअल नंबर पर भेजा जाता था तथा उसके एवज में उनके खातों में अलग-अलग नंबरों से पैसे आते थे। गिफ्ट कार्ड मिलने के बाद उनके द्वारा केवल कुछ ग्राहकों को ही एंटीवायरस ऐप उपलब्ध कराया जाता था।

उक्त गिफ्ट कार्ड को वे सस्ते दामों में विदेशी नागरिकों को बेच देते थे, जिसके एवज में उनके द्वारा भी उनके खातों में पैसा डाला जाता था। उनके द्वारा जितने भी विदेशी नागरिकों से धोखाधड़ी की गई है, उनमे से अधिकतर अमेरिका तथा कनाडा के है। अपनी कॉल सेन्टर को उनके द्वारा एक स्थान पर कुछ समय के लिये ही संचालित किया जाता था, जिसके उपरान्त वो जगह बदल देते थे, ताकि पुलिस या किसी अन्य एजेंसी को उनके विषय में कोई जानकारी न हो सके।
