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हल्द्वानी में कुमाऊं द्वार महोत्सव में पहुंचे सीएम धामी, संस्कृति और प्रदेश के सम्मान पर दिया जोर

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हल्द्वानी में कुमाऊं द्वार महोत्सव में पहुंचे सीएम धामी, संस्कृति और प्रदेश के सम्मान पर दिया जोर

shikhrokiawaaz.com

10/25/2026





हल्द्वानी:मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज रविवार को हल्द्वानी में आयोजित ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक कलाओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक आयोजन प्रदेश की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे कार्यक्रमों से युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने और राज्य की विशिष्ट पहचान को समझने का अवसर मिलता है।

मुख्यमंत्री ने महोत्सव में उमड़ी भीड़ और आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हल्द्वानी कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख प्रवेश द्वार है। यह शहर पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को व्यापक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि लोकगीतों और लोकनृत्यों के जरिए संस्था नई पीढ़ी को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से परिचित करा रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान यहां के लोकगीतों, पारंपरिक नृत्यों और वाद्य यंत्रों से भी जुड़ी हुई है। छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी और न्योली जैसी लोक विधाएं पहाड़ की जीवनशैली और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाती हैं। वहीं, ढोल-दमाऊ, रणसिंहा और भंकोरा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विशेष स्वरूप देते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से उत्तराखंड का लोक संगीत अब देश-विदेश तक पहुंच रहा है। यह सकारात्मक संकेत है कि युवा भी अपनी लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने में रुचि ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश आस्था, अध्यात्म और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का केंद्र है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की विशिष्ट पहचान को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और सशक्त भू-कानून की दिशा में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करना तथा कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।



मुख्यमंत्री ने युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि उत्तराखंड के हितों से जुड़े फैसलों में सरकार पीछे नहीं हटेगी।




कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहे जाने संबंधी टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नागरिकों के सम्मान और स्वाभिमान से जुड़े विषयों पर जिम्मेदारी के साथ बात होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन का भी उल्लेख किया और कहा कि अलग राज्य के निर्माण के लिए आंदोलनकारियों ने संघर्ष और बलिदान दिया। रामपुर तिराहा गोलीकांड जैसी घटनाएं राज्य के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिन्हें प्रदेशवासी आज भी याद करते हैं।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी जिम्मेदार संवाद की आवश्यकता बताई। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रहित से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष से भी ऐसे विषयों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर गंभीरता से विचार करने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी बेटी को न्याय दिलाना समाज और व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि इस संवेदनशील मामले में तथ्यों, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, न्यायालय की कार्यवाही और कानून के तहत होने वाली प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय मिलना सबसे महत्वपूर्ण है और ऐसे मामलों को राजनीतिक लाभ का जरिया बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। सरकार युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने, महिलाओं को सशक्त बनाने और परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेशवासियों के सहयोग से उत्तराखंड सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में आगे बढ़ता रहेगा।

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