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भारत बनेगा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब*

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भारत बनेगा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब*

shikhrokiawaaz.com

05/27/2026

भारत में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। केंद्र सरकार की पीएलआई (Production Linked Incentive) 2.0 योजना और नए औद्योगिक पार्कों के माध्यम से देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकारी नीतियों का उद्देश्य केवल मोबाइल असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में ही इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, चिप्स और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स के निर्माण को बढ़ावा देना है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उत्पादन को मजबूती मिलेगी।
पिछले कुछ वर्षों में पीएलआई योजना के तहत कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में अपने उत्पादन केंद्र स्थापित या विस्तारित किए हैं। इसके परिणामस्वरूप देश में निवेश बढ़ा है और लाखों रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएलआई 2.0 योजना इस सेक्टर के लिए और अधिक प्रभावशाली साबित होगी, क्योंकि इसका फोकस अब केवल असेंबली नहीं बल्कि पूरी सप्लाई चेन के विकास पर है। इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कई कंपनियाँ अब वैकल्पिक उत्पादन केंद्रों की तलाश में हैं, जिसमें भारत एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत को अभी सेमीकंडक्टर, हाई-टेक कंपोनेंट्स और रिसर्च एवं डेवलपमेंट के क्षेत्र में और निवेश की आवश्यकता है। यदि यह प्रयास सफल रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन सकता है।
कुल मिलाकर, भारत तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।पीएलआई 2.0 और औद्योगिक विकास योजनाएँ इस बदलाव को और गति दे रही हैं, जिससे देश वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में पहुँच सकता है।
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