देहरादून-: सोशल मीडिया अब मात्र लोगो का फ़ास्ट दूरसंचार का "माध्यम" नही रह है, यह खुद में ज्ञान की पाठशाला बनता जा रहा है, जहां लोग एक घटना में एक "अफवाह" सुनते है और सारी दुनिया मे सबसे पहले "असल खबरी" बनने के चक्कर मे अफवाह की एक चिंगारी भर से घटना की पटकथा रच दे रहा है, फिर चाहे पीड़ित व्यक्ति के साथ कुछ भी घटित हुआ है, किरदार व वाक्य पूरी मुँह जुबानी व शब्द दर शब्द सोशल मीडिया में आग की तरह फैलती है, जिससे कानून व्यवस्था के सामने हर रोज़ नई चुनौतियां सामने आ रही है। और अफवाह सर्कुलेट करने वालो के दावे ऐसे कि- हमसे असल वाक्य छिपाया जा रहा है, असल वाक्या यह, वह.... के साथ समाज को हिंसा की आग में झोंकने का काम कर रहे है।
हाल ही में ऐसा वाक्य राजधानी देहरादून के पटेलनगर थाना के चंद्रबनी क्षेत्र की घटना में देखने को मिला है जहां एक युवती अपने दोस्तो संग ब्रू कैफ़े गयी जहां दो पक्षो में हो रहे विवाद के दौरान एक पक्ष के युवक द्वारा करची से किये किया गलती से युवती के सिर पर लग ,जिसमे युवती गंभीर रूप से घायल हो गयी और वर्तमान में इंद्रेश अस्पताल में उपचाराधीन है। घटना में युवती के घायल होने की खबर जैसे ही खबरों में चली, लोगो द्वारा युवती के सिर पर हुए गहरे घाव को असल मे चापड़ से वार किए जाने की बात सोशल मीडिया में आग की तरह फैला दी। जबकि युवती के मेडिकल में चिकित्सको द्वारा भी युवती पर चापड़ से हमले से इंकार किया गया व पुलिस द्वारा भी सरासर इंकार किया गया था। किंतु शहर में बीते दिनों हुई घटना के फेर में कुछ "तत्वों " द्वारा हर घटना में खासतौर पर युवतियो/महिलाओं के साथ हो रही घटना को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की जा रही है, जो कहीं न कहीं एक सभ्य समाज मे अपुष्ट खबरों के चलते दंगे, अराजकता, कानून व्यवस्था के खिलाफ आम जनमानस में अविश्वास को पैदा कर रहा है। जबकि पुलिस बल द्वारा उस घटना का तुरंत संज्ञान लेते हुए युवती का फौरी मेडिकल, घटना की जानकारी व सभी तथ्यों को जुटाया गया था,किन्तु उसके बावजूद सोशल मीडिया न्यूज़ "चैनल" में तथ्यों के आधार पर नही बल्कि जिनको घटना की "हवा" तक नही है उनके आधार पर घटना की पुष्टि की जा रही है। इन सब अफवाहों के दौर में आज खुद पीड़ित युवती द्वारा अपना एक वीडियो जारी कर अपने ऊपर चापड़ के हमले से इंकार किया है व उक्त हमला गलती से उसपर होने की पुष्टि की है, जिसे ज़्यादा तरजीह देना अब शायद "खुद में खबरी" बने लोगो के लिए मुनासिब होगा और होना भी चाहिए।
बीते दिनों राजधानी में जो भी घटनाएं घटी है वह दुखद है और नही होनी चाहिए थी किन्तु उसका मतलब कतई नही है कि जो कानून व्यवस्था सम्भाल रहे है व घटनाओं का "ग्राउंड जीरो" पर मौका मुआयना कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे है, उनके तथ्यों को नज़रन्दाज़ कर "सोशल मीडिया" की खबरों पर आंख मूंद विश्वास किया जाए, क्योंकि वह सिर्फ खबर पहुँचाने का माध्यम है, कोई आधिकारिक माध्यम नही!