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मुश्किलों में "अजय" सा खाकी संग है!

मुश्किलों में "अजय" सा खाकी संग है!
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मुश्किलों में

shikhrokiawaaz.com

02/13/2026

 देहरादून पुलिस का कप्तान होना न सिर्फ राजधानी के कानून व्यवस्था को सम्भालने की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है बल्कि राजनीतिज्ञयो का केंद्र( मुख्यता सरकारी कामकाज) के लिहाज से भी देहरादून पुलिस के ऊपर शहर को सुरक्षित व व्यवस्थित बनाये रखने का जिम्मा हर दिन नई कठिनाईयों को आमंत्रित करता है,कहना गलत नही होगा। ऐसे में जिन भी पुलिस अधिकारियों के कंधे राजधानी देहरादून के कमान आई है उनके कार्यकाल पर प्रदेशभर की निगाह बनी रहती है। वर्ष 2023 सितंबर में राजधानी देहरादून की कमान पुलिस कप्तान अजय सिंह के जिम्मे आई थी, जिसका कार्यभार संभालने के साथ ही उनके द्वारा अपनी टीम व अपने बीच विश्वास की बागडोर मजबूत करने को बतौर कप्तान नेतृत्व किया तो वहीं कर्तव्यपथ पर जवानो का हौसला बुलंद भी किया। कार्तव्यपथ पर खड़ा उनकी टीम के हर एक जवान को "खाकी में इंसान" की भावना को कई मौके पर उनके द्वारा अपने आचरण में शामिल किया गया, उनके द्वारा जनपद में कार्यरत बीमार पुलिसकर्मियों के हाल चाल जानने स्वयं उनके पास जाना, न सिर्फ हालचाल बल्कि अफसर का जवानो के कंधे पर "हौसले" व "परिस्थिति जल्द ही अनुकूल होगी, खाकी परिवार साथ है" के शब्द  जवानो में नए संचार का माध्यम बने। त्योहारों का मौका हो तो अपने कप्तान के रुतबे को दरकिनार कर त्योहार में अपने जवानो के बीच पहुँच "उनसा हो जाने" की आत्मीयता कप्तान अजय की पहचान है, जिससे जवानो में भी अपने कप्तान के लिए सम्मान दो आसमां और ऊंचा दिखाई दिया।

कप्तान अजय "मिलनसार" व सरल स्वभावी कप्तान के तौर पर जाने जाते है जो अपने हर जवान के "फर्ज में शिद्दत" का सम्मान करते है, उनके द्वारा अपने जवानो को जिस भी ड्यूटी पर ग्राउंड ज़ीरो पर भेजा, तो उनकी "बैकबोन" बनकर उनके साथ कार्तव्यपथ पर बराबर में खड़े भी नज़र आये, किन्तु लापरवाही पर वह सख्त मिजाजी भी थे, जो एक कप्तान की  मजबूत भूमिका के लिए अत्यंत आवश्यक है।

उनका खाकी में चरित्र जितना स्पष्ट, बेबाक, शालीन, निष्ठ रहकर अपराध के खिलाफ वह कड़े रहे उतना ही सॉफ्ट कार्नर उनके किरदार में जानवरो के लिए कई मौकों पर देखा गया है। पुलिस लाईन में निरीक्षण के मौका हो, कोई राजकीय, प्रादेशिक कार्यक्रम में घोड़ो को परेड में शामिल करने के दौरान वह घोड़ो से बात करते नज़र आये, जो उनके जानवर प्रेम को दर्शाता है।

शहर में सुरक्षा व्यवस्था हो, वीआईपी मूवमेंट, कोई आयोजन, बड़े धार्मिक आयोजन आदि उनके द्वारा हर एक कार्य मे प्रो व कॉन्स को बारीकी से समझना, पिछले आयोजनों में हुई गलतियों, सफलताओं का बारीकी से आंकलन कर आगे की रणनीति बनना व उस लिहाज से अपनी टीम के हर अधिकारी व कर्मियों को समझाना उनके दूरगामी, सुस्पष्ट, काबिलियत, उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। वह अपने अधिकारियों व कर्मियों के बीच खाकी को सदैव से ऊपर रखने , टीम वर्क को तरजीह देने के रूप में जाने जाते थे। बात करें शहरवासियों की तो कप्तान अजय सिंह उन पुलिस अधिकारियो में शामिल है, जो मात्र सरकारी कुर्सी पर बैठकर आम जनता से दूरी बनाये उन बातों पर  विश्वास नही करते, बल्कि जब भी मौका मिला उन्होंने अपनी टीम संग शहर के किसी भी व्यस्तम इलाके में उतर शहवासियो, दुकानदारों से बातचीत कर कानून व्यवस्था व पुलिस बल की कार्यशैली को बारीकी से परखा, जिससे शहवासियो में उनकी 'विश्वसनीयता' मजबूत हुई।

लॉ एंड आर्डर को प्रबल रखने को उनके द्वारा वक़्त दर वक़्त कई सुधार किए, वह चाहे लापरवाह अधिकारियों व कर्मियों के तबादले हो, या कर्मियों का निलबंन उन्होंने लापरवाही बर्दाश्त नही की। आपरेशन कालनेमि उनके कार्यकाल के सफल आपरेशन में एक रहा, जिसके चलते शहवासियो को खाकी ने ढोंगियों व धर्म के नाम पर लोगो की आस्था से खिलवाड़ करने वालो के मुँह से झूठ का मुखौटा हटाया,जिसकी शहरभर में आम जनमानस द्वारा प्रशंसा भी की गईं, जो एक कप्तान द्वारा अपने कार्यकाल में हासिल की जाने वाली बड़ी उपलब्धियों में से एक होती है।

नई अधिकारियों, नई भर्तियों व युवा पीढ़ी का हौसला अफजाई करने से भी वह कभी पीछे नही रहे, उनके द्वारा देश सेवा में आगे आने वाले युवाओ को ड्यूटी में फर्ज को सर्वोपरि रखने का आवाहन- उनके देश व खाकी के प्रति सम्मान को तो दिखाता ही है, साथ ही भावी पीढ़ी को एक काबिल अधिकारी वह है जो दूसरों को आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करे- वह चित्रण करने दिखाया है, जो उनकी काबिलियत व समर्पण में सर्वोत्तम सरीखा है।

शहर की कानून व्यवस्था को बनाये रखने में दून पुलिस के सामने बहुत चुनौतियां आयी किन्तु उसके बाद भी उन्होंने टीम संग हर विपत्ति का 'अजेय' बनकर सामना किया है,जो बताता है वह बेहतरीन अधिकारी है और सदैव रहेंगे।
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