चमोली:आजकल जहां एक ओर आधुनिकता की दौड़ में कई पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं, वहीं उत्तराखंड की एक महिला ने अपने जुनून और मेहनत के दम पर न केवल इस विरासत को बचाने का बीड़ा उठाया, बल्कि उसे नई पहचान भी दिलाई है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जनपद चमोली से सामने आई निकिता रावत की कहानी नारी शक्ति, आत्मनिर्भरता और रचनात्मकता का ऐसा उदाहरण है, जो हर किसी को प्रेरित करता है।
निकिता रावत पुलिस लाइन गोपेश्वर में तैनात प्रतिसार निरीक्षक आनंद सिंह रावत की पत्नी हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों और बच्चों की देखभाल के साथ उन्होंने अपने हुनर को आगे बढ़ाते हुए भोजपत्र से हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने की शुरुआत की। उनकी इस रचनात्मक पहल को पहचान मिली और उन्हें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट काशीपुर के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (एफआईईडी) कार्यक्रम में चयनित होने का अवसर मिला, जहां उन्होंने चमोली जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने उत्पादों को प्रस्तुत किया।
निकिता रावत ने एम.एससी. (मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी) की शिक्षा प्राप्त की है और एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट के रूप में मेडिकल कॉलेज, फार्मास्यूटिकल, कॉस्मेटिक और मेडिकल डिवाइस क्षेत्रों में शोध एवं विकास से जुड़ा अनुभव भी हासिल किया है। इससे पहले वह सिडकुल में भी कार्य कर चुकी हैं।
भोजपत्र, जिसका उपयोग प्राचीन समय में धार्मिक ग्रंथों, जन्मकुंडली और पौराणिक लेखन में किया जाता था, आधुनिक समय में लगभग समाप्त होने की कगार पर था। निकिता रावत ने इसी पारंपरिक धरोहर को आधुनिक हस्तशिल्प के रूप में विकसित करते हुए उससे कई आकर्षक उत्पाद तैयार किए हैं। उन्होंने भोजपत्र से नेमप्लेट, की-चेन, वॉल क्लॉक, डिजिटल निमंत्रण पत्र, लालटेन पर कलाकृतियां, सजावटी वस्तुएं, चीड़ के छंतु से बने आभूषण और ईयरिंग्स जैसे कई उत्पाद तैयार किए हैं, जो लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हो रहे हैं।
हाल ही में आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 में उनका स्टॉल आकर्षण का केंद्र बना रहा। इसके अलावा देहरादून के राजभवन में आयोजित बसंतोत्सव 2026 में भी उनकी प्रतिभा को सम्मान मिला, जहां राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने उन्हें “विजयश्री भोजपत्र लेखा” के लिए सम्मानित किया।
निकिता रावत की इस पहल की सराहना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, गीता धामी, वन मंत्री सुबोध उनियाल और डीजीपी उत्तराखंड दीपम सेठ सहित कई प्रमुख लोगों ने भी की है। उनकी यह पहल “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को भी मजबूत करती है।
पुलिस कप्तान चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने निकिता रावत की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाकर पारंपरिक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया है। उनका यह प्रयास न केवल महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है, बल्कि देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
महिला दिवस के अवसर पर निकिता रावत की यह कहानी बताती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और रचनात्मक सोच के साथ कोई भी महिला अपने सपनों को साकार कर सकती है और समाज के लिए प्रेरणा बन सकती है।
