जेन जी के जोश व "उचित" हट के आगे झुका सिस्टम!

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जेन जी के जोश व

shikhrokiawaaz.com

07/26/2026


" Gen Z, We are Gen Z" यह शब्द आज हर उस सदस्य ने सुन व समझ लिया ही होगा जिसने इसका नाम पहले कभी नही सुना था। नेपाल में गत वर्ष नेपाल के युवाओं ने जेन जी की ताकत दिखाकर इस टर्म को देश विदेश की सुर्खियों में ला दिया था। वहीं आज हर भारतीय ने इस जेन जी शब्द व इस पीढ़ी के बच्चो की जबरदस्त ताकत, हौसले हाल ही में दिल्ली के जंतर मंतर प्रदर्शन में देख ही लिए जिसने आज भारत भर में "गलत होने पर मंत्री तक का पद जा सकता है" का बेहतरीन उदाहरण पेश कर देश की जनता में सुधार की गुंजाइश बाकी है कि उम्मीद वापिस जगाई है।


3 मई 2026 को देशभर में आयोजित हुई नीट की परीक्षा में धांधली होने की खबर बाहर आते ही देश के हर एक युवा व उनके अभिभावकों के मन मे धांधली करने व देश की इतनी बड़ी परीक्षा के इतनी आसानी से लीक हो जाने के चलते उच्च स्तरीय अधिकारी के खिलाफ रोष था, जिसका नेतृत्व किया कॉकरोच जनता पार्टी ने। यह वही पार्टी है जिसका कुछ महीनों पहले अस्तित्व ही नही था व न किसी न शायद सोचा ही होगा कि ऐसी कोई पार्टी बनेगी। देश के मुख्य न्यायाधीश के द्वारा की गई कुछ टिप्पणी में सीधे तौर पर " कॉकरोच" शब्द को युवा पीढ़ी ने इस प्रकार पकड़ा की वर्चुअल दुनिया से शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी(सीजेपी) ने सीधे तौर पर जंतर मंतर के मैदान से केंद्र सरकार को चुनौती दे डाली, वह भी "पेपर में धांधली होने का जिम्मेदार तो शिक्षा मंत्री ही है, उन्हें पद से इस्तीफा देना ही होगा"। 

6 जून को अभिजीत दिबके के नेतृत्व में जंतर मंतर के मंच से अभिजीत जेन जी की आवाज़ बन गए। कभी न कभी देश के किसी न किसी राज्य में आज पेपर लीक होने की खबर सामने आ ही रही है, उन परीक्षाओं में अपने भविष्य से खुलेआम खिलवाड़ होने से आहत हर युवा ने अभिजीत दिबके के आवाहन को अपना आवाहन मान लिया और अपने हक के लिए देश के अलग अलग कोनो से जंतर मंतर में एकत्रित हो गए।

जेन जी को नही पता था आंदोलन कब तक चलेगा, खाने को मिलेगा नही मिलेगा, कब क्या होगा, पर कहा जाता है यह पीढ़ी बिंदास है, जो अपने हौसले और हटी स्वभाव के चलते जंतर मंतर पर डटी रही। देश के प्रसिद्ध सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचूक भी इस आंदोलन का हिस्सा बने और 26 दिन तक युवाओं के साथ हुए धोखे के खिलाफ अनशन पर बैठे रहे।

जेन जी व सोनम वांगचूक के "धांधली बर्दास्त नही व जिम्मेदारो की जिम्मेदारी तय हो, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से नीचे किसी बात पर प्रदर्शन न छोड़ेंगे" के हट ने आखिरकार हर उस युवा पीढ़ी की जीत तय कर दी और धर्मेंद्र प्रधान ने कल शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जेन जी के इस आंदोलन में 20 जुलाई के दिन सदैव याद रखा जाएगा , क्योंकि उस दिन युवाओं ने सोनम वांगचूक को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन धरना स्थल से उठाने के खिलाफ संसद चलो मार्च किया था। दिल्ली का सीपी उस दौरान दूसरा जंतर मंतर बन गया। युवाओं पर लाठी भांजी गयी, खदेड़ा गया, आंसू गैस के गोले, पानी की बौछार की गई, किन्तु युवाओं के वह डंडे डिगा न सके। युवा 20 जुलाई के बाद नई ताकत के साथ जंतर मंतर में उमड़े। प्रदर्शन ने आंदोलन का रूप ले लिया था और जो पहले इसमें शामिल न थे वह भी देश के अलग अलग हिस्सों से इस आंदोलन में आये। युवाओं के इस दौरान आंदोलन में बोर न होने के चलते खुद से ही मनोरंजन का साधन ढूंढने को नाच- गाना करने का रूप भी सामने आया, जो याब भी सोशल मीडिया में ट्रेंडिंग है।

युवाओं का हौसला इस दौरान जीत गया और प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी द्वारा युवाओं को देश का भविष्य बता धांधली के खिलाफ फ़ास्टट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला सुनाया तो वहीं अगले दिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही जेन जी ने इस जंग में अपनी जीत पक्की कर ली।

भारत मे आज जेन जी के लिए mass level protest ने भारत मे एक उदाहरण पेश किया है कि अगर देश मे भ्रष्ट्राचार, धांधली होगी तो सिर्फ छोटे स्तर के कर्मचारी, अधिकारियों के ऊपर दोष मढ़ने से काम नही चलेगा, गलती अगर मंत्री की होगी तो वह भी पद से हटेगा।"  जेन जी ने इस आंदोलन में जीत के चलते नीट परीक्षा में धांधली के चलते अपनी जान देने वाले छात्रों को न्याय दिलाने का काम भी किया है। किंतु यह भी नज़रअन्दाज़ नही किया जा सकता कि भारत के युवाओं का प्रदर्शन सभ्य रहा जिन्होंने देश की सत्ता को चेताने को हिंसा, संसद में तोड़फोड़, आग लगाने का सहारा न लेकर शांन्तिपूर्ण प्रदर्शन का सहारा लिया। तो कहना तो बनता है - जेन जी सुलझा हुआ हो तो "कूल" है!!
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