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और करें तो हक है और पुलिस करे तो रौब!

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और करें तो हक है और पुलिस करे तो रौब!

shikhrokiawaaz.com

06/07/2026


देहरादून-: आज के दौर में आप अगर पुलिस कर्मचारी है तो आप अपना परिचय सोच समझ कर दे!  चाहे आप विपत्ति में है या आपका परिजन परेशान है, किन्तु आप पुलिस में है तो आपको न्याय मिले न मिले ताना जरूर मिलेगा पुलिस में है न तभी धौंस दिखा रहा। हमारा सिस्टम ही ऐसा हो गया है। अगर कोई नेता कोई ,अभिनता की बात होती तो पुलिस को मैनेज करना पड़ता है किंतु बात अगर पुलिस के परिवार या परिजनों की आती है तो पूरा सिस्टम पुलिसकर्मी के खिलाफ हो जाता है। मानो ख़ाकीवर्दी पहना हुआ इंसान इंसान नही है। उसका काम केवल सिस्टम को खुश करने का है। राजनीतिक पार्टियों में तो सीएम अपनी कुर्सी तक अपने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए छोड़ देते है फिर चाहे देश किसी भी संकट काल से गुजर रहा हो। बंगाल में भी सुनने में आया है कि एक सुप्रीमो का अपने भतीजे से बेहद प्रेम था वो अपनी नैया डुबोकर ही मानी।


वर्तमान में हमारी राजधानी देहरादून में आये दिन कुछ न कुछ घटना होती रहती है। और वो पूरे समाज के लिए और भी चर्चा का विषय हो जाता है जब उसमे पुलिस या उसके संबंधित कोई शामिल हो।


राजधानी के पित्थुवाला स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज में भी शिक्षकों द्वारा ही छात्रो को नकल करवाने व एक छात्र की पिटाई का मामला बड़ा तूल पकड़ता जा रहा है और उसमे खास एंगल इसलिए क्योंकि छात्र का पिता दरोगा है। एक तरफ जहां सिविल इंजिनीयरिंग के एक तृतीय वर्षीय छात्र द्वारा पेपर के दौरान क्लास में मौजूद शिक्षकों द्वारा अन्य छात्रो को खुलेआम नकल करवाने का विरोध करने पर 4 शिक्षकों द्वारा उस छात्र को कक्षा व बाहर लिफ्ट के पास जमकर पीटा, गाली गलौच की है, वहीं दूसरी तरफ उसी कॉलेज के प्रधानाचार्य द्वारा उसी छात्र व उसके पिता द्वारा 5 जून को कॉलेज आकर सभी स्टाफ से मारपीट करने के आरोप लगाए है। इस पूरे प्रकरण में दोनो तरफ से मुकदमा दर्ज किया गया है और जांच शुरू हो गयी है।


वहीं प्रतिष्ठित अखबारों में भी छात्र के द्वारा उसे पिता का दरोगा होने का रौब दिखाकर कॉलेज प्रशासन को धमकी देना प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है व छात्र के दरोगा पिता द्वारा कॉलेज में परिजनों संग आकर मारपीट किये जाने का सीसीटीवी का फुटेज की क्लिप भी प्रमुखता से प्रकाशित कर पुलिस की गुंडागर्दी आदि शीर्षक चलाया है। किंतु इस प्रकरण में जिस छात्र द्वारा शिक्षको से उसे बेराहमी से पीटने का आरोप लगाया है, उसके शरीर पर कई जगह वाकई चोट के निशान मिले है साथ ही छात्र द्वारा शिक्षको की मार से उसके कान का पर्दा फटने की भी बात सामने आई है। वहीं एक ऑडियो भी सामने आया है जहां एक शिक्षक छात्र से उसको मारने को लेकर माफी मांग रहा है व छात्र द्वारा उसे बेरहमी से मारने पर गलत करने की बात कही जा रही है। तो कॉलेज नकल प्रकरण में एक तरफा घटनाक्रम का आंकलन किस आधार पर हुआ व क्यों मात्र कॉलेज का ही नजरिया दिखाया गया है?


पीडित छात्र द्वारा आरोप लगाया गया है कि कॉलेज प्रधानाचार्य द्वारा स्वयं से कक्षा में लगे सीसीटीवी कैमरों में अन्य छात्रों को ग्रुप में बिठाकर शिक्षको द्वारा नकल करवाया जाना देखा गया व माना गया फिर उसे ही सजा क्यों मिली और कॉलेज में शिक्षको द्वारा उसे कई घंटों तक बंदी बनाकर रखा गया, बार बार मारा गया,उसके पिता को गाली दी गयी, पुलिस की गुंडागर्दी के आरोप लगाए गए तब प्रधानाचार्य महोदय द्वारा शिक्षकों का आचरण का नही देखा गया केवल पिता-पुत्र के खिलाफ कार्यवाही की मांग क्यों की गई? शिक्षकों का छात्रो का भविष्य अंधेरे में धकेलने का आचरण क्यों नज़रअन्दाज़ हुआ? 



 वहीं इस प्रकरण में देखा जाए तो छात्र के पिता जो दरोगा है वह अगले अपने पुत्र के साथ कॉलेज गए वह दरोगा की हैसियत से नही एक पिता की हैसियत से कॉलेज गए थे, क्योंकि हम में से किसी का बेटा बेवजह स्कूल में इसलिए पिट जाए क्योंकि वह कुछ बोला और ऊपर से पिता पुलिस में हो तो और मारो, तो हम भी क्यों सहेंगे! दरोगा द्वारा अपने बेटे की पिटाई का कारण पूछना वाजिब है। हालांकि उस दौरान दोनो पक्षो के बीच मारपीट हुई जो नही होनी चाहिए थे, किन्तु उसके बाद खाली शिक्षक ही क्यों काली पट्टी बांधकर शिक्षक समाज की सुरक्षा की मांग उठा रहे है, ऐसे में तो कल अगर छात्र भी अपने शिक्षकों की मार के खिलाफ काली पट्टी पहनकर कॉलेज आये व प्रदर्शन करे तो उसपर डिसिप्लिनरी एक्शन तो नही होगा न?


दरोगा द्वारा गुण्डागर्दी तो प्रमुखता से सुर्खियों में आ गया किन्तु दरोगा अपने बेटे के लिए न्याय कहाँ मांगे? कॉलेज प्रबंधन द्वारा अगर छात्र के आरोपो को झूठा बताया जा रहा है तो छात्र के शरीर पर चोट के निशान कहाँ से आये, बड़ा सवाल है।  राजधानी के सरकारी कॉलेज में जहां बच्चो के भविष्य को प्रोफेशनल दिशा देने को सरकार ने जिन शिक्षको के कंधे जिम्मा सौंपा है वहाँ के शिक्षक अपना कर्तव्य भूला रहे है, उसका न्याय सरकार करेगी? माना छात्र का पिता पुलिस में दरोगा है तो क्या उसे न्याय का अधिकार नही। 

इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूर होनी चाहिए और मीडिया में केवल कॉलेज वालो का ही नरेटिव सेट करवाने के बजाय छात्र का पक्ष भी सुनना चाहिए।




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