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एमबीबीएस फर्जी प्रमाणपत्र मामले में भोपाल निवासी अभियुक्त गिरफ्तार

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एमबीबीएस फर्जी प्रमाणपत्र मामले में भोपाल निवासी अभियुक्त गिरफ्तार

shikhrokiawaaz.com

09/24/2026

देहरादून-: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के फर्जी आश्रित प्रमाणपत्र मामले में एसआईटी ने भोपाल निवासी एक और अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्त भोपाल में एमबीबीएस वे के नाम से आफिस संचालित करता है जिसके माध्यम से देश के अलग अलग कोनो में विभिन्न प्राईवेट युनिवर्सिटिज में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए, बीकॉम आदि कोर्सों में कमिशन पर एडमिशन दिलवाने का काम करता था।अभियुक्त रूपेश से गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान उत्तरकाशी में एक मेडिकल कॉलेज में हुई थी, और उसी के द्वारा एमबीबीएस में स्वतंत्रता सेनानी के कोटे से बच्चो को एडमिशन दिलाने को तहसील में अपने पहचान के पटवारी से मिलवाया गया था व प्रमाणपत्र बनवाने पर कमीशन प्राप्त किया गया था।


  गौरतलब है कि बीती 13 सितंबर को थाना रायपुर तथा थाना क्लेमेंटाउन में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा 'अपनी सरकार' पोर्टल पर स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने हेतु ऑनलाइन आवेदन किये गए थे। उनकी जांच कर रहे राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने को प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी पाए गए। जिसके विरुद्धजांचकर्ता राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा थाना रायपुर पर मु0अ0सं0- 380/26 धारा 318(4) 338/336(2)/340(2) बीएनएस तथा थाना क्लेमेंटाउन पर मु0अ0सं0: 86/26 धारा: 318(4) 338/340(2)/61(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज करवाया था। मामले में और छानबीन होने पर उक्त बच्चो द्वारा एमबीबीएस में प्रवेश हेतु उक्त फर्जी आश्रित प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया जाना पता चला था। मामले में जांच हेतु पुलिस कप्तान प्रमेन्द्र डोबाल द्वारा एसपी ग्रामीण जया बलोनी के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की। वहीं थाना रायपुर में दर्ज मुकदमे में विवेचना के दौरान धारा 3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी की गयी थी।


मामले के खुलासे के बाद से ही प्रकरण की जांच को एसपी ग्रामीण जया बलोनी के नेतृत्व में  गठित एसआईटी द्वारा इस प्रकरण में संलिप्त अभियुक्तों के विरूद्ध साक्ष्य एकत्रित करते हुए प्रकरण से जुडे सभी दस्तावेजों को कब्जे मे लिया गया है।  

वहीं छानबीन के दौरान बीते दिनों एसआईटी द्वारा मेरठ निवासी मुख्य आरोपी व एक अभ्यर्थी के पिता को गिरफ्तार किया गया था। एमबीबीएस सीट स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित के कोटे पर बनवाने को 45-45 प्रति अभ्यर्थी सौदा तय करने वाले अभियुक्त रूपेश की निशानदेही पर एसआईटी ने उसके मेरठ स्थित घर से फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के एवज में लिये गये 8 लाख रुपये बरामद किये गये थे।


 मामले की और छानबीन करने के दौरान प्रकाश में आये साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी द्वारा प्रकरण में संलिप्त एक और अभियुक्त धीरज श्रीवास्तव(37) पुत्र  दिवाकर कुमार श्रीवास्तव  निवासी हाउस नंबर 61, खजूरी कलान रोड, थाना पिपलानी, जिला भोपाल, मध्य प्रदेश को वाहन संख्या: एम0पी0-04-वाई-0655 के साथ गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त के वाहन की तलाशी के दौरान एसआईटी ने वाहन से 5लाख 58 हज़ार 100 रू0 बरामद किये। अभियुक्त द्वारा उक्त पैसे रूपेश पंडित द्वारा उसे स्वतंत्रता से सेनानी कोटे से कुछ छात्रों को एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर देनी स्वीकार किया है।


कप्तान प्रमेन्द्र डोबाल ने बताया कि अभियुक्त धीरज श्रीवास्तव,  भोपाल में 46 सी सेक्टर इंद्रपुरी थाना पिपलानी,भोपाल में एमबीबीएस वे के नाम से आफिस संचालित करता है जिसके माध्यम से वह विभिन्न प्राईवेट युनिवर्सिटिज में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए, बीकॉम आदि कोर्सों में कमिशन पर एडमिशन दिलवाने का काम करता था। कप्तान ने बताया कि अभियुक्त रूपेश पण्डित से उसकी मुलाकात दो साल पहले मंजरी देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हिटाणु, उत्तरकाशी में हुई थी तथा उसके बाद से ही दोनो अभियुक्त लगातार एक दूसरे के सम्पर्क में थे। 


अभियुक्त अरविंद द्वारा अपनी पुत्री व अपने दो अन्य परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस में दाखिले के लिये रूपेश से सम्पर्क करने पर रूपेश द्वारा इस सम्बन्ध में अपने साथी धीरज कुमार श्रीवास्तव से बात की थी, जिसके द्वारा उसे अपने एक अन्य साथी से लो मेरिट वाले बच्चों का एमबीबीएस में एडमिशन के बारे जानकारी की गई तो उसके द्वारा उन्हें उत्तराखण्ड में स्वतंत्रता सेनानी के कोटे में एडमिशन होने की बात बताई गई तथा उन्हें एडमिशन की प्रक्रिया के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए अपने एक परिचित, जिसकी तहसील व कचहरी में अच्छी सेटिंग है, से मिलने हेतु बताया गया।


जिसके बाद धीरज कुमार श्रीवास्तव द्वारा रूपेश पण्डित व अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर तीनो अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनावाये गये थे। जिसके आधार पर उक्त तीनों अभ्यर्थियों द्वारा अलग-अलग मेडीकल कालेजों में एमबीबीएस कोर्स के लिये दाखिला प्राप्त किया था। 


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